SOS full form – SOS signal क्या है?

SOS full form – Save Our Ship

दोस्तो शायद आप लोगो ने SOS के बारें में कही ना कहीं जरूर सुना होगा। अगर आपने कोई ऐसी Hollywood की Movie देखी होगी जिसमें कोई पानी वाली जहाज़ की कहानी दिखाई गई हो तब तो आपनें SOS का नाम जरूर सुना होगा। अब आप में से बहुत से लोग आश्चर्य में ऑड गए होंगे कि आख़िर SOS का Movie और पानी की ज़हाज़ से क्या संबंध है?

तो दोस्तो अगर आपको अभी भी SOS का मतलब याद नहीं आया तो आप परेशान ना हो क्योंकि आज हम आपको ना सिर्फ़ SOS full form बताएंगे बल्कि इसके पूरे मतलब को भी समझायेंगे।

आइये आज के इस Article की शुरुआत करते हैं SOS का फुलफॉर्म जानने से –

SOS full form in Hindi

SOS एक सिग्नल है जो के मदद मगाने के लिए किया जाता है तो जानते है SOS full form in Hindi.

SOS full form in Hindi

SOS फुलफॉर्म – Save Our Souls

SOS in Hindi – सेव ऑवर सोल्स

इसका एक और फुलफॉर्म है – Save Our Ship

SOS in Hindi – सेव ऑवर शिप

दोस्तों SOS के फुलफॉर्म का Hindi में मतलब होगा –

Save Our Souls – हमारी रक्षा करो

तथा Save Our Ship का मतलब होगा- हमारे जहाज़ की रक्षा करो।

तो दोस्तों अब शायद आपको थोड़ा बहुत ये समझ में आ गया होगा कि हम इसके मतलब को समझने के लिए ‘पानी की ज़हाज़’ की बात क्यों कर रहे थे? अगर अभी भी आप नहीं समझ पाएं है तो इस Post को आगे ज़रा ध्यान से पढियेगा, क्योंकि हम अब आपको इस ‘SOS’ का मतलब समझाने वाले हैं।

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SOS क्या है?

दरअसल ‘SOS’ एक प्रकार का Signal है जो कि पहले समय Ship में फँसे नाविकों द्वारा Help माँगने के लिए भेजा जाता था। या फ़िर यूँ कहें कि जब कोई नाविक या यात्री किसी Ship पर यात्रा के समय Emergency में फँस जाता था तो उसके द्वारा Help माँगने के लिए एक विशेष प्रकार का Signal भेजा जाता था, जिसे की ‘SOS’ कहा जाता था।

पहले के समय में जब Mobile Phone और Internet नहीं हुआ करते थे तब उस समय में ही ये Signal नाविकों द्वारा Help माँगने के लिए Use किया जाता था।

SOS Signal के फायदे क्या है?

ये एक विशेष प्रकार का संकेत होता था जो कि भिन्न- भिन्न माध्यमों से भेजा जाता था। इस संकेत को सुनकर या देखकर ही व्यक्ति समझ जाता था कि कोई मदद के लिए पुकार रहा है। फ़िर इसके बाद Life Saving Operation चलाकर के उस खतरें में फँसे हुए व्यक्ति की जान बचा ली जाती थी।

SOS Signal की history

SOS Signal की शुरुआत सबसे पहले 1905 में हुई थी। सबसे पहले इसे German सरकार ने 1 अप्रैल 1905 को प्रयोग में लाया था।बाद में इसे नाविकों की जान बचाने के लिए पूरे विश्व मे एक Special Signal के रूप में प्रचारित किया गया। इसे Distress Code तथा Morse Code भी कहा जाता है।

साधरणतः ये Distress Code जहाज़ में फँसे नाविकों द्वारा Telegraphic Message के रूप में ही भेजा जाता था। इस Telegraphic Message को दूर लगे Radio Station से Catch कर लिया जाता था और SOS के संकेत को समझकर तुरन्त ही मदद पहुँचाने का काम शुरू कर दिया जाता था।

SOS Signal कैसे भेजते है?

SOS का Signal रेडियो पर तरंगे भेजने के साथ ही अन्य कई माध्यमों से भी भेजा जाता था। हम यहाँ पर आपको SOS Message भेजने के सभी माध्यमों को भी बताने वाले हैं लेकिन उससे पहले आइये हम SOS Message के संकेत को कैसे पहचाना जाता है ये समझ लेते हैं।

दोस्तों SOS संकेत एक डॉट Message का रूप होता है। इसमें SOS के तीनों ही अक्षरों का अलग-अलग संकेत होता है। जिसे मिलाकर इस पूरे Message को समझा जाता है। इसमें पहले S तथा आख़िरी S को लगातार तीन डॉट से तथा बीच के O को लगातार तीन डैश से Show किया जाता है।

इस प्रकार से SOS का संकेत होगा  – …—…

ऐसे में जब कोई नाविक कहीं ख़तरे में फँसता था तो वो टेलीग्राफ से ऐसे ही संकेत देकर Help की माँग करता था।
दोस्तो टेलीग्राफ के अलावा भी SOS का संकेत देने के अलग माध्यम भी हुआ करते हैं-

SOS Signal भेजने के तरीके

  • टेलीग्राफ़ द्वारा- पुराने समय मे Ship में एक टेलीग्राफी यन्त्र लगा होता था। जिसकी मदद से किनारे के लोगों तक Radio Signal भेजा जाता था। Ship में फँसे नाविकों द्वारा SOS Code को Radio Station तक पहुँचाया जाता था। अब इन Radio Station पर बैठें लोगों द्वारा इस Signal को पढ़ के उन्हें मदद पहुँचा दी जाती थी।
  • Light से- SOS का संकेत Light द्वारा भी भेजा जा सकता है। इसके लिए Light को SOS के Code में जला और बुझाकर संकेत दिया जाता है।
  • Mirror द्वारा- दिन के समय किसी ऐसी ज़गह फँसे होने पर जहाँ से आवाज़ निकालना सम्भव ना हो वहाँ से Mirror द्वारा SOS संकेत भेजा जा सकता है। Mirror द्वारा मदद माँगने के लिए आईने को धूप की मदद से चमकाया जाता है। ताकि लोगो का ध्यान आपकी तरफ़ पड़े और वो आपकी Help कर सकें।

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SOS पोस्ट पर हमारी राय

SOS Signal का Use आज भी होता है लेकिन अब इसका स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है।अब इन SOS Signal की ज़गह हमारें Mobile फ़ोन में Save Emergency Contact Number नें ले ली है। अब हम अगर कहीं बहु तथा किसी भी प्रकार की Emergency में फँसते हैं तो हम इस Emergency नम्बर पर Call कर के मदद माँग सकते हैं। आज के समय में इसे ही SOS कहा जाता है।

इस पोस्ट में हम ने जाना की SOS signal क्या है, कैसे भेजते है और SOS full form in Hindi के बारे में.

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