MCLR full form in Hindi – MCLR क्या है?

MCLR full form – Marginal cost of fund based lending rates

अगर आपने कभी किसी कामर्शियल बैंक से कोई लोन नहीं लिया है तो बहुत अच्छा है। लेकिन अगर आपने लोन लिया है तो आप जानते ही होंगे कि लोन का एक लैंडिंग रेट यानी उधार दर होता है। यह रेट तय करने के तरीके होते हैं। बैकिंग सेक्टर लगातार बदलावों से गुजरता आ रहा है।

पहले बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट्स यानी बीपीएलआर, फिर एमसीएलआर यानी MCLR। क्या आप जानते हैं कि MCLR full form है? अगर नहीं तो आज हम आपको इसकी जानकारी देंगे-से लेकर बेस रेट और अब

MCLR full form in Hindi

MCLR की फुल फार्म है – Marginal cost of fund based lending rates

MCLR in Hindi

यानी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट्स। दरअसल, एमसीएलआर: यह एक उधार दर है, जिस पर बैंक लोगों को लोन देता है। इसे करीब तीन साल पहले लागू किया गया था। इससे पहले बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट्स यानी बीपीएलआर लागू था।

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बेस रेट में बदलाव डालता है असर

आपको बता दें कि बेस रेट में अगर थोड़ा भी बदलाव होता है तो वह आम आदमी की परचेज पावर पर असर डालता है। MCLR की बात करें तो इसके चार कंपोनेंट्स हैं-पहला, मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड यानी एमसीएफ।

बता दें कि नए लोन बैलेंस पर जो ब्याज दर होती है, उसे एमसीएफ कहा जाता है।

दूसरा, निगेटिव कैरी ऑन अकाउंट ऑफ कैश रिजर्व रेश्यो यानी सीआरआर। यह वह राशि है, जो बैंकों को आरबीआई के पास रखनी पड़ती है। ऐसे फंड्स की कास्ट को निष्क्रिय रखा जाता है और लोगों को दिए गए लोन से वसूला जाता है।

तीसरा, अवधि का प्रीमियम: दरअसल, यह यह वह राशि होती है, जो लोन की अवधि के साथ बढ़ती जाती है.

चौथा ऑपरेटिंग कॉस्ट यह लोन प्रॉडक्ट्स मुहैया कराने की लागत होती है, जिसमें फंड जुटाने और बैंकिंग बिजनेस को संचालित करने की कीमत भी शामिल होती है।

आरबीआई ने कमर्शियल बैंकों से मासिक या सालाना एमसीएलआर रेट्स तय करने को कहा मतलब कि आपके पास पूर्व-निर्धारित समय पर होम लोन की नई ब्याज दरें होंगी। क्रेडिट रिस्क और लोन की अवधि को देखते हुए बैंकों को अपना फैलाव एमसीएलआर से ज्यादा करने की भी इजाजत दी गई।

MCLR का मतलब क्या है?

आपको बता दें कि दरअसल, मार्जिनल का मतलब होता है अतिरिक्त। उधार दर को कैलकुलेट करते हुए, बैंकों को अतिरिक्त या बदली हुई लागत स्थिति पर विचार करना होगा, जो MCLR पर असर डालता है।

MCLR दरों में बदलाव होने की स्थिति में अगर बैंक ने होम लोन ब्याज दर के लिए 6 महीने की फ्रीक्वेंसी तय कर दी है तो हर 6 महीने बाद दरों को रीसेट किया जाएगा। MCLR का असर मानीटरी पालिसी पर भी पड़ता है।

दरअसल, बैंकों को इसकी कैलकुलेट करते हुए रेपो रेट में बदलाव पर भी विचार करना होता है। बेस रेट सिस्टम में ऐसा नहीं होता था। उधार लेने वाले और देने वालों के लिए भी MCLR एक सही उधार दर है।

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MCLR पोस्ट पर हमारी राय

इस पोस्ट में हम ने जाना की MCLR क्या है, क्यों ज़रूरी है, MCLR और BPLR में क्या फर्क है और MCLR full Form in Hindi के बारे में।

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